अध्याय के पाठ पर जाइए
Curiosityअध्याय 8 जल की अवस्थाओं की यात्रा

जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा: कक्षा 6 विज्ञान · अध्याय 8

(A Journey through States of Water · जिज्ञासा / Curiosity)

जिज्ञासा · हिंदी नोट्स, सिमुलेशन और अभ्यास · NCERT का आधिकारिक अध्याय PDF ↗

प्रकाशित · अपडेट

  • 95 मिनट
  • 3 सिमुलेशन
  • 16 अभ्यास प्रश्न
  • 26 MCQ

इस अध्याय में आप क्या सीखेंगे

  • सरल परीक्षणों से दिखाना कि बर्फ़, पानी और जलवाष्प एक ही पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं
  • कपड़े सूखने और 'पसीना छोड़ते' गिलास जैसे रोज़ के उदाहरणों से वाष्पन और संघनन को समझाना
  • ठोस, द्रव और गैस की तुलना उनके आकार, बहने और फैलने के आधार पर करना
  • बताना कि गर्म करने और ठंडा करने से पानी एक अवस्था से दूसरी अवस्था में कैसे बदलता है
  • एक निष्पक्ष परीक्षण की योजना बनाना, जिससे पता चले कि सतह का क्षेत्रफल, गर्मी, हवा और आर्द्रता वाष्पन की गति को कैसे बदलते हैं
  • मटके और पॉट-इन-पॉट कूलर में वाष्पन के शीतलन प्रभाव को समझाना
  • बताना कि बादल और वर्षा कैसे बनते हैं, और जल चक्र में पानी की यात्रा को क्रम से समझाना

NCERT विज्ञान कक्षा 6, अध्याय 8, पृ. 143–162 पर आधारित मौलिक सहायक पाठ। यह NCERT से जुड़ा नहीं है और NCERT ने इसका समर्थन नहीं किया है।

बर्फ़ और पानी: एक ही या अलग-अलग?

अप्रैल की एक दोपहर अचानक आँधी आती है और स्कूल के मैदान पर ओले बरसने लगते हैं। आप एक ओला उठा लेते हैं। वह सख़्त और बर्फ़ीला है, और आप उसे उँगलियों के बीच घुमा सकते हैं। एक मिनट बाद आपकी हथेली में बस पानी की कुछ बूँदें बचती हैं। क्या बर्फ़ और पानी सच में दो अलग चीज़ें हैं?

आपकी एक दोस्त को लगता है कि ये अलग हैं। वह कहती है कि शरबत में डालने वाली बर्फ़ फ़्रीज़र से आती है, तो शायद फ़्रीज़र पानी में कुछ नया मिला देता है। आप इसकी जाँच कैसे करेंगे? वैज्ञानिक बहस करके इसका फ़ैसला नहीं करती। वह एक सरल परीक्षण करती है और ध्यान से देखती है।

2/4पिघलते हुए टुकड़ा छोटा होता जाता है, और उसके नीचे पानी जमा होता है।

चित्र 8.1बर्फ़ और पानी एक-दूसरे में बदल जाते हैं, इसलिए वे एक ही पदार्थ की दो अवस्थाएँ हैं।NCERT पृ. 144

मेज़ पर एक घड़ी के पास काँच का एक पारदर्शी कप रखा है। पहले चरण में सूखे कप में बर्फ़ का एक टुकड़ा है और घड़ी 0 मिनट दिखाती है। दूसरे चरण में, 10 मिनट पर, टुकड़ा छोटा हो गया है और कप की तली पर पानी की पतली परत है। तीसरे चरण में, 30 मिनट पर, टुकड़ा गायब है और कप में सिर्फ़ पानी है। आख़िरी चरण में कप फ़्रीज़र में रहा है, जिसे एक हिमकण से दिखाया गया है, और पानी कप की आकृति वाली बर्फ़ बन गया है।

बर्फ़, द्रव पानी और जलवाष्प (water vapour) एक ही पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं। फिर भी इनका व्यवहार बहुत अलग है। बर्फ़ के टुकड़े को आप उठाकर उँगलियों में उलट-पलट सकते हैं। पानी के साथ ऐसा कीजिए, तो वह उँगलियों के बीच से बहकर फ़र्श पर टपक जाता है। इस अध्याय में हम पानी के साथ-साथ चलेंगे, जब वह एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाता है।

झटपट जाँच
2 में से 1
बर्फ़ और पानी दो अलग-अलग पदार्थ हैं।
उत्तर देखें

उत्तर गलत

ये दो अवस्थाओं में एक ही पदार्थ हैं। पिघलने से बर्फ़ पानी बनती है, और जमने से पानी फिर बर्फ़ बन जाता है।

8.1 पानी के गायब होने की जाँच

मानसून की तेज़ बौछार के बाद स्कूल के मैदान में जगह-जगह पानी के छोटे-छोटे गड्ढे भर जाते हैं। छुट्टी की आख़िरी घंटी तक उनमें से कई छोटे हो जाते हैं और कुछ गायब हो जाते हैं। वह सारा पानी कहाँ गया?

घर में भी पानी गायब होता है। धोने के बाद रैक में रखी प्लेटों से पानी टपकता है, फिर भी एक घंटे बाद वे सूखी होती हैं। स्टील की प्लेट मिट्टी जैसी नहीं है। क्या पानी स्टील में सोखकर उसके अंदर छिप सकता है? या वह कहीं और चला जाता है? आइए, इन दोनों विचारों को परखें।

2/3पानी अदृश्य वाष्प बनकर निकलता है, इसलिए उसका फैलाव छोटा होता जाता है।

चित्र 8.2पानी ऊपर से हवा में जाता है, प्लेट से होकर नहीं।NCERT चित्र 8.1 · पृ. 145

स्टील की एक प्लेट टिशू पेपर के गुलाबी चौकोर टुकड़े पर रखी है। शुरुआत में प्लेट के बीच में पानी है, जिस पर 'पानी' लिखा है। 1 घंटे बाद पानी का फैलाव लगभग आधा रह गया है और उससे ऊपर उठते टूटी रेखा वाले तीर हैं, जिन पर 'अदृश्य वाष्प' लिखा है। 3 घंटे बाद प्लेट सूखी है और टूटी रेखा वाला एक घेरा दिखाता है कि पानी कहाँ था। एक लेबल बताता है कि टिशू पूरे समय सूखा रहता है।

पानी के निकलने का एक ही रास्ता था: ऊपर, हवा में। रास्ते में वह जलवाष्प बन गया, यानी गैस के रूप में पानी। जलवाष्प हवा में इस तरह घुल-मिल जाती है कि दिखाई नहीं देती, इसलिए हम उसे जाते हुए नहीं देख पाते।

परिभाषा
वाष्पन (evaporation)

द्रव पानी का जलवाष्प में बदलना। यह पानी की सतह पर होता है, कमरे के ताप पर भी।

उदाहरणबालकनी में सूखती गीली स्कूल यूनिफ़ॉर्म।

वाष्पन के लिए पानी का उबलना ज़रूरी नहीं। यह हर समय चुपचाप होता रहता है, ठंडे कमरे में भी। गीले बाल सूख जाते हैं। कॉपी पर लगी स्याही सूख जाती है। बारिश से धुली सड़क फिर से सूख जाती है। गर्मी इसे तेज़ कर देती है: गर्म तवे पर छिड़की बूँदें छन्न से एक-दो सेकंड में गायब हो जाती हैं।

अब चूल्हे पर रखी एक केतली की कल्पना कीजिए। पानी उबलने पर उसकी टोंटी से सफ़ेद गुबार निकलता है। बहुत-से लोग इसे भाप कहते हैं। पर ध्यान से देखिए। टोंटी के ठीक सिरे पर थोड़ी साफ़ ख़ाली जगह है, और सफ़ेद गुबार थोड़ा आगे जाकर शुरू होता है।

3/4थोड़ा आगे वाष्प ठंडी होकर नन्ही बूँदें बन जाती है, जो हमें दिखती हैं।

चित्र 8.3जलवाष्प अदृश्य होती है। सफ़ेद धुंध द्रव पानी की नन्ही बूँदों से बनी है।NCERT पृ. 145

जलते चूल्हे पर एक केतली रखी है। पहले चरण में टोंटी से कुछ नहीं निकलता। दूसरे चरण में टोंटी के ठीक बाहर टूटी रेखा वाला एक घेरा साफ़ ख़ाली जगह दिखाता है, जिस पर 'साफ़ जगह: वाष्प' लिखा है; यहाँ से अदृश्य जलवाष्प निकलती है। तीसरे चरण में टोंटी से थोड़ा दूर छोटे-छोटे गोलों का एक बादल दिखता है, जिस पर 'नन्ही बूँदों की धुंध' लिखा है। आख़िरी चरण में धुंध दूर बहकर हल्की पड़ जाती है, और लेबल बताता है कि बूँदें फिर से सूख जाती हैं।

साफ़ ख़ाली जगह में सिर्फ़ जलवाष्प है, और वह अदृश्य है। थोड़ा आगे वाष्प ठंडी होकर द्रव पानी की अनगिनत नन्ही बूँदें बन जाती है। आपको वही बूँदें दिखती हैं। जल्दी ही वे फिर से वाष्पित हो जाती हैं, और सफ़ेद गुबार हल्का होकर गायब हो जाता है।

अब फिर से पानी के गड्ढों की बात। मिट्टी वाले खेल के मैदान में कुछ पानी मिट्टी में सोख जाता है और कुछ वाष्पित हो जाता है। सीमेंट की सड़क पर पानी अंदर नहीं सोख सकता, इसलिए लगभग सारा पानी वाष्पित हो जाता है। तो मिट्टी के मैदान के लिए सही जवाब है: दोनों।

झटपट जाँच
3 में से 1
इनमें से किसमें वाष्पन हो रहा है?
उत्तर देखें

उत्तर (D) रस्सी पर गीले कपड़ों का सूखना

सूखते कपड़ों का पानी वाष्प बनकर निकलता है, यही वाष्पन है। आइसक्रीम का टपकना पिघलना है, ठंडी बोतल पर बूँदें बनना संघनन है, और बर्फ़ के टुकड़े बनाना जमना है।

8.2 एक और रहस्य

जुलाई के एक उमस भरे दिन फ़्रिज से ठंडे पानी की बोतल निकालिए। कुछ ही मिनटों में उसका बाहरी हिस्सा गीला हो जाता है। नन्ही बूँदें उस पर छा जाती हैं, फिर आपस में मिलकर नीचे लुढ़कती हैं। लगता है जैसे बोतल को पसीना आ रहा हो। यह पानी कहाँ से आता है?

3/3नन्ही बूँदें मिलकर बड़ी बूँदें बनती हैं, जो नीचे बहती हैं।

चित्र 8.4हवा की वाष्प ठंडे गिलास पर बूँदें बन जाती है, जबकि अंदर पानी का स्तर नहीं घटता।NCERT चित्र 8.2 · पृ. 146

बाईं ओर बर्फ़ जैसे ठंडे पानी का गिलास है, जिसमें पानी के स्तर पर टेप का निशान है। दाईं ओर गिलास की दीवार का पास से दृश्य है: एक तरफ़ ठंडा पानी, और दूसरी तरफ़ हवा, जिसमें जलवाष्प के बिंदु घूम रहे हैं। पहले चरण में गिलास सूखा है और पास के दृश्य में हवा में वाष्प दिखती है। दूसरे चरण में गिलास का बाहरी हिस्सा बारीक धुंध से धुँधला है, और पास के दृश्य में ठंडी दीवार पर नन्ही बूँदें बनती हैं। तीसरे चरण में बूँदें मिलकर बड़ी हो गई हैं, एक बूँद नीचे बहती है, और तले पर थोड़ा पानी जमा होता है। हर चरण में पानी का स्तर निशान पर ही रहता है।

आपकी कक्षा में कई विचार आ सकते हैं। शायद पानी गिलास से रिसता है। शायद बर्फ़ के टुकड़े बाहर फिसलकर पिघल जाते हैं। शायद बूँदें हवा से आती हैं। अच्छे वैज्ञानिक अपना पसंदीदा विचार चुनने के बजाय हर विचार को परखते हैं। देखिए, दो दोस्तों ने अपने विचार कैसे परखे।

चरण दर चरण

तारा और कबीर तीन विचार परखते हैं

चरण 1 / 5

तीन अनुमान

तारा तीन अनुमान लिखती है। पहला: पानी गिलास से रिसकर बाहर आता है। दूसरा: पिघली बर्फ़ किनारे के ऊपर से निकलकर नीचे बहती है। तीसरा: बूँदें गिलास के आसपास की हवा से आती हैं।

1 / 5

ये बूँदें आपने कई जगह देखी हैं। सर्दी की सुबह घास ओस (dew) से गीली होती है। उबलती दाल के बर्तन के ढक्कन के नीचे की तरफ़ बूँदें होती हैं। गर्म पानी से नहाने के बाद बाथरूम का शीशा धुँधला हो जाता है। एसी वाले कमरे से बाहर निकलते ही चश्मे पर धुंध छा जाती है।

हर बार हवा की जलवाष्प किसी ठंडी चीज़ से मिलती है। वाष्प ठंडी होकर फिर से द्रव की बूँदें बन जाती है। इस बदलाव को संघनन (condensation) कहते हैं।

परिभाषा
संघनन

जलवाष्प का द्रव पानी में बदलना। यह तब होता है जब वाष्प ठंडी होती है, जैसे किसी ठंडी सतह को छूने पर।

उदाहरणबर्फ़ वाले पानी के गिलास के बाहर बनी बूँदें।

ओस भी इसी तरह बनती है। रात में पत्तियाँ और घास ऊष्मा खोकर आसपास की हवा से ठंडी हो जाती हैं। हवा की वाष्प उन पर संघनित हो जाती है। दिन चढ़ने तक धूप पत्तियों को गर्म कर देती है, और ओस फिर से वाष्पित हो जाती है।

3/4वाष्प संघनित होकर ओस की बूँदें बन गई है।

चित्र 8.5ओस वह जलवाष्प है जो रात में ठंडी हुई पत्तियों पर संघनित हो गई।NCERT पृ. 148

ज़मीन पर एक बड़ी पत्ती और घास की पत्तियाँ हैं। पहले चरण में, गर्म शाम को, सूरज डूब रहा है। दूसरे चरण में, चाँद और तारों वाली ठंडी रात में, पत्ती के पास जलवाष्प के बिंदु जमा होते हैं, जिस पर 'पत्ती ठंडी होती है' लिखा है। तीसरे चरण में, भोर की ओस में, सूरज उगते समय पत्ती पर और घास की नोकों पर ओस की गोल बूँदें हैं। आख़िरी चरण में सूरज ऊपर है, बूँदें छोटी होती जाती हैं, और 'वाष्प ऊपर उठती है' लिखे टूटी रेखा वाले तीर दिखाते हैं कि ओस वाष्पित हो रही है।

क्या संघनन से पसीना छोड़ते गिलास का रहस्य भी सुलझ सकता है? कबीर का विचार था गिलास को तौलना। आइए, उसका परीक्षण करके देखें।

3/3और बूँदें: 487.3 g, और स्तर वहीं है।

चित्र 8.6गिलास भारी होता जाता है जबकि पानी का स्तर वहीं रहता है, इसलिए अतिरिक्त पानी हवा से आता है।NCERT पृ. 149

स्टील के ढक्कन से ढका बर्फ़ वाले पानी का गिलास डिजिटल तराज़ू पर रखा है, और पानी के स्तर पर टेप का निशान है। 0 मिनट पर गिलास सूखा है और डिस्प्ले पर 486.0 g है। 15 मिनट पर बाहर छोटी बूँदें छा गई हैं और डिस्प्ले पर 486.7 g है। 30 मिनट पर गिलास बड़ी बूँदों से ढका है, डिस्प्ले पर 487.3 g है, एक लेबल बताता है कि गिलास 1.3 g भारी हुआ, और निशान दिखाता है कि पानी का स्तर वही है।

उदाहरणNCERT क्रियाकलाप 8.4 · पृ. 149

तराज़ू हमें क्या बताता है?

मीना ने तौलने वाला परीक्षण किया। शुरुआत में उसके तराज़ू पर 486.0 g था और 30 मिनट बाद 487.3 g। अंदर पानी का स्तर टेप के निशान पर ही रहा। (a) बाहर कितना पानी जमा हुआ? (b) वह कहाँ से आया?

पहले खुद हल करके देखिए। फिर हल को एक-एक चरण करके खोलिए।

सिमुलेशनठंडी प्लेट से मिलती वाष्प

गर्म पानी से भरा एक बर्तन, जिसमें पानी चलते कणों के रूप में दिखाया गया है, और एक थर्मामीटर। कुछ कण सतह से वाष्प बनकर निकल जाते हैं। आप बर्तन के ऊपर एक ठंडी प्लेट चालू कर सकते हैं: जो वाष्प-कण उस तक पहुँचते हैं, वे धीमे होकर उसकी निचली सतह पर द्रव की बूँदों में इकट्ठे हो जाते हैं। ताप का स्लाइडर बदलता है कि कण कितनी तेज़ी से चलते हैं और कितने बाहर निकलते हैं।

चित्र 8.7यह सिमुलेशन पानी को छोटे-छोटे चलते कणों के रूप में दिखाता है। गर्म पानी से वाष्प निकलती है, और ऊपर रखी ठंडी प्लेट उसे फिर से बूँदों में बदल देती है।
करके देखिए
  • ठंडी प्लेट को बंद और चालू कीजिए। हर बार बाहर निकलने वाले कण आख़िर में कहाँ पहुँचते हैं?
  • पानी का ताप कम कीजिए। क्या अब कम कण प्लेट तक पहुँचते हैं?
झटपट जाँच
4 में से 1
ठंडे गिलास के बाहर बूँदें बनती हैं, क्योंकि…
उत्तर देखें

उत्तर (A) हवा की जलवाष्प ठंडे गिलास पर संघनित होती है

अंदर का स्तर वही रहता है और गिलास भारी होता है, इसलिए पानी हवा से आता है। रिसने से स्तर घटता और गिलास हल्का होता।

8.3 पानी की अलग-अलग अवस्थाएँ कौन-सी हैं?

अब तक हमने पानी को सख़्त बर्फ़, बहते पानी और अदृश्य वाष्प के रूप में देखा है। यही उसकी तीन अवस्थाएँ हैं: ठोस (solid), द्रव (liquid) और गैस (gas)। हर अवस्था दूसरी से अलग क्यों है? आइए, इन्हें छूकर और बरतकर पता लगाएँ।

3/3अपना आकार; बर्तन का आकार लेना; पूरी जगह भरना।

चित्र 8.8ठोस अपना आकार बनाए रखता है, द्रव बर्तन का आकार ले लेता है, और गैस उसे मिली पूरी जगह भर देती है। बिंदु वाष्प को दिखाते हैं, जिसे हम असल में देख नहीं सकते।NCERT सारणी 8.3 · पृ. 150

तीन स्तंभों में बर्फ़, पानी और जलवाष्प दिखाए गए हैं। पहले चरण में बर्फ़ का टुकड़ा एक गोल कटोरे में है, पानी एक कटोरे में उथला फैला है, और बिंदुओं से दिखाई गई वाष्प एक छोटे बंद डिब्बे में भरी है। दूसरे चरण में वही बर्फ़ का टुकड़ा बिना बदले एक लंबे गिलास में है, वही पानी अब पतले गिलास में ऊँचा स्तंभ बनाता है, और वाष्प के बिंदु एक बहुत बड़े बंद जार में फैल गए हैं। आख़िरी चरण में स्तंभों के नीचे लेबल दिखते हैं: 'अपना आकार', 'बर्तन का आकार' और 'पूरी जगह भरना'।

तुलना

तीनों अवस्थाएँ साथ-साथ

ठोस (बर्फ़)

  • इसका अपना आकार होता है
  • यह बहता नहीं
  • यह एक तय जगह घेरता है

द्रव (पानी)

  • यह बर्तन का आकार ले लेता है
  • यह बहता है और सतह पर फैलता है
  • यह एक तय जगह घेरता है

गैस (जलवाष्प)

  • इसका अपना कोई आकार नहीं होता
  • यह बहती है और हर दिशा में फैलती है
  • यह जहाँ तक पहुँच सके, सारी जगह भर देती है

सिर्फ़ पानी ही ऐसा पदार्थ नहीं है जो ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। अपनी कक्षा में चारों ओर देखिए और जो दिखे, उसे छाँटिए। ब्लैकबोर्ड, आपकी स्टील की पानी की बोतल और क्रिकेट की गेंद ठोस हैं। स्याही, नारियल पानी और शहद द्रव हैं।

गैसों को पहचानना ज़्यादा मुश्किल है, क्योंकि ज़्यादातर गैसें अदृश्य होती हैं। आपके आसपास की हवा गैसों का मिश्रण है, जिसमें ज़्यादातर नाइट्रोजन और ऑक्सीजन हैं। सोडा की बोतल के बुलबुले कार्बन डाइऑक्साइड गैस हैं। रसोई के गैस चूल्हे में जलने वाला ईंधन भी एक गैस है।

गैस दिखाई न दे, तब भी आप बता सकते हैं कि वह फैलती है। कक्षा के एक कोने में संतरा छीलिए। जल्दी ही दूसरे छोर पर बैठे दोस्तों को उसकी महक आने लगती है। महक हवा से होकर उन तक पहुँच गई है।

झटपट जाँच
3 में से 1
कौन-सा गुण सिर्फ़ गैसों का है?
उत्तर देखें

उत्तर (B) उन्हें जितनी जगह मिले, वे सारी भर देती हैं

द्रव भी बहते हैं, इसलिए बहना सिर्फ़ गैसों की ख़ासियत नहीं है। सिर्फ़ गैस फैलकर अपना पूरा बर्तन भर देती है। तय आकार ठोसों का गुण है।

8.4 हम पानी की अवस्था कैसे बदल सकते हैं?

मान लीजिए, आप चाहते हैं कि बर्फ़ का टुकड़ा जल्दी पिघले। आप उसे गर्म हथेली में पकड़ सकते हैं या धूप में रख सकते हैं। दोनों तरीकों से उसे ऊष्मा मिलती है, और ऊष्मा से बर्फ़ पिघलती है। पानी को गर्म करते रहिए, तो वह और तेज़ी से वाष्पित होता जाता है, जब तक कि वह उबलकर पूरा वाष्प न बन जाए।

उल्टा करने के लिए ऊष्मा हटाइए। पानी को फ़्रीज़र में रखिए, तो वह जमकर बर्फ़ बन जाता है। जलवाष्प को ठंडा कीजिए, तो वह संघनित होकर द्रव पानी बन जाती है।

परिभाषा
पिघलना (melting)

गर्म करने पर ठोस का द्रव में बदलना।

उदाहरणगिलास में बर्फ़ का पानी बनना।

परिभाषा
जमना (freezing)

ठंडा करने पर द्रव का ठोस में बदलना।

उदाहरणफ़्रीज़र की ट्रे में पानी का बर्फ़ बनना।

दूसरे पदार्थ भी पिघलते और जमते हैं। जलती मोमबत्ती की लौ के पास मोम साफ़ द्रव बन जाता है। किनारे से नीचे बहते हुए वह ठंडा होकर फिर सख़्त हो जाता है। एक चम्मच जमा हुआ घी गर्म रोटी को छूते ही पिघल जाता है। और उत्तर भारत की कड़ाके की सर्दी में नारियल का तेल बोतल के अंदर जमकर सफ़ेद ठोस बन जाता है।

4/4गर्म करने से पानी सीढ़ी पर ऊपर जाता है; ठंडा करने से नीचे आता है।

चित्र 8.9ऊष्मा देने से पानी सीढ़ी पर ऊपर चढ़ता है। ऊष्मा हटाने से वह नीचे उतरता है।NCERT चित्र 8.5 · पृ. 152

तीन डिब्बे एक के ऊपर एक रखे हैं: सबसे नीचे ठोस बर्फ़, बीच में द्रव पानी, और सबसे ऊपर गैस, यानी जलवाष्प। पहले चरण में सिर्फ़ डिब्बे दिखते हैं। दूसरे चरण में 'पिघलना' लिखा एक नारंगी तीर बर्फ़ से पानी की ओर ऊपर जाता है, और 'जमना' लिखा एक टूटी रेखा वाला नीला तीर नीचे आता है। तीसरे चरण में 'वाष्पन' लिखा एक नारंगी तीर पानी से वाष्प की ओर ऊपर जाता है, और 'संघनन' लिखा एक टूटी रेखा वाला नीला तीर नीचे आता है। आख़िरी चरण में बाईं ओर एक लंबा नारंगी तीर बताता है 'ऊष्मा दीजिए', और दाईं ओर एक लंबा टूटी रेखा वाला नीला तीर बताता है 'ऊष्मा हटाइए'।

सिमुलेशनगर्म कीजिए, ठंडा कीजिए

कणों के रूप में दिखाया गया पानी से भरा एक बंद बर्तन, साथ में एक थर्मामीटर और अवस्था का नाम बताने वाला लेबल। 0 °C से नीचे कण एक तय क्रम में बैठे रहते हैं और बस थोड़ा-थोड़ा हिलते हैं: यह बर्फ़ है। 0 °C से ऊपर गर्म करने पर वे एक-दूसरे के पास से फिसलने लगते हैं: यह द्रव पानी है। 100 °C के पास वे बिखरकर पूरे बर्तन में भर जाते हैं: यह जलवाष्प है। एक स्लाइडर ताप को −20 °C से 120 °C तक बदलता है।

चित्र 8.10ताप का स्लाइडर खिसकाइए और देखिए कि पानी एक अवस्था से दूसरी अवस्था में कैसे बदलता है। लेबल गर्म जलवाष्प को 'भाप' (steam) कहता है: यह वही अदृश्य गैस है।
करके देखिए
  • −10 °C से शुरू कीजिए और पानी को धीरे-धीरे गर्म कीजिए। किस ताप पर लेबल बदलकर द्रव हो जाता है?
  • इसे 110 °C तक गर्म कीजिए, फिर वापस ठंडा कीजिए। रास्ते में आपको अवस्था के कौन-कौन से बदलाव दिखते हैं?
झटपट जाँच
3 में से 1
हर बदलाव को उसके नाम से मिलाइए।

बाईं ओर कोई चीज़ छुइए, फिर दाईं ओर उसका जोड़ा।

उत्तर देखें
उत्तर
  • बर्फ़ → पानी : पिघलना
  • पानी → बर्फ़ : जमना
  • पानी → जलवाष्प : वाष्पन
  • जलवाष्प → पानी : संघनन
गर्म करने से पिघलना और वाष्पन होता है। ठंडा करने से जमना और संघनन होता है।

8.5 पानी को तेज़ी से या धीरे वाष्पित कैसे किया जा सकता है?

कपड़े धोने के दिन कुछ कपड़े एक घंटे में सूख जाते हैं, जबकि कुछ शाम तक नम रहते हैं। अप्रैल के गर्म और हवादार दिन रस्सी जल्दी ख़ाली हो जाती है। मानसून में एक तौलिया दो दिन तक नम रह सकता है। तो कोई न कोई चीज़ तय करती है कि पानी कितनी तेज़ी से वाष्पित होगा।

आइए, एक बार में एक ही चीज़ की जाँच करें। पहला सवाल: क्या इससे फ़र्क पड़ता है कि पानी कितना फैला हुआ है?

3/3प्लेट सूख गई। ढक्कन अब भी गीला है।

चित्र 8.11उतना ही पानी बड़े क्षेत्रफल पर फैला हो, तो बहुत जल्दी सूखता है।NCERT सारणी 8.4 · पृ. 154

ऊपर से देखने पर, बोतल के एक छोटे ढक्कन और स्टील की एक बड़ी प्लेट, दोनों में एक-एक चम्मच पानी है। शुरुआत में टूटी रेखाएँ ढक्कन में पानी का छोटा क्षेत्रफल और प्लेट पर फैला बड़ा क्षेत्रफल दिखाती हैं। 1 घंटे बाद प्लेट का पानी सिकुड़कर एक छोटा-सा धब्बा रह गया है, जबकि ढक्कन अब भी भरा दिखता है। 3 घंटे बाद प्लेट पर 'सूखी' लिखा है और ढक्कन पर 'अब भी गीला'।

उदाहरणNCERT पृ. 154

निष्पक्ष परीक्षण की योजना: क्या हवा से मदद मिलती है?

अर्जुन जानना चाहता है कि क्या हवा चलने से पानी तेज़ी से वाष्पित होता है। उसके पास दो एक जैसी तश्तरियाँ, पानी, एक छोटा चम्मच और एक टेबल फ़ैन है। उसके लिए एक निष्पक्ष परीक्षण की योजना बनाइए।

पहले खुद हल करके देखिए। फिर हल को एक-एक चरण करके खोलिए।

2/3धूप वाली कटोरी का पानी तेज़ी से कम होता है।

चित्र 8.12सूरज की गर्मी से पानी तेज़ी से वाष्पित होता है।NCERT चित्र 8.6 · पृ. 155

पानी से भरी स्टील की दो एक जैसी उथली कटोरियाँ ज़मीन पर रखी हैं, बाईं ओर वाली धूप में और दाईं ओर वाली पेड़ की छाँव में। शुरुआत में दोनों में बराबर पानी है। 30 मिनट बाद धूप वाली कटोरी लगभग आधी ख़ाली है, और उससे वाष्प के टूटी रेखा वाले तीर ऊपर उठ रहे हैं, जबकि छाँव वाली कटोरी का पानी थोड़ा ही कम हुआ है। 1 घंटे बाद धूप वाली कटोरी पर 'सूखी' लिखा है और छाँव वाली में अब भी ज़्यादातर पानी है।

आपके परीक्षण चार चीज़ें बताते हैं जो वाष्पन को तेज़ करती हैं। बड़ी सतह से ज़्यादा पानी हवा को छूता है। धूप या चूल्हे की गर्मी पानी को गर्म करती है। बहती हवा पानी के ठीक ऊपर की नम हवा को दूर ले जाती है। और सूखी हवा वाष्प को आसानी से अपने में ले लेती है।

आख़िरी बात से समझ आता है कि मानसून में कपड़े क्यों नहीं सूखते। जब हवा में पहले से बहुत वाष्प होती है, तो हम कहते हैं कि आर्द्रता ज़्यादा है। ऐसी हवा नई वाष्प को बहुत धीरे लेती है। इसलिए बारिश के दिनों में गीले कपड़े देर तक नम रहते हैं।

सिमुलेशनवाष्पन प्रयोगशाला

कणों के रूप में दिखाए गए पानी की एक खुली तश्तरी, साथ में एक थर्मामीटर और हवा में निकल चुके कणों को गिनने वाला काउंटर। कंट्रोल से आप ताप बदल सकते हैं, हवा चला सकते हैं, छोटी और बड़ी सतह के बीच बदल सकते हैं, और ढक्कन लगा सकते हैं। ज़्यादा गर्म कण ज़्यादा बार निकलते हैं, हवा उन्हें दूर ले जाती है, बड़ी सतह से ज़्यादा कण निकलते हैं, और ढक्कन उन्हें बाहर जाने से रोकता है।

चित्र 8.13एक बार में एक ही चीज़ बदलिए और बाहर निकले कणों का काउंटर देखिए।
करके देखिए
  • छोटी सतह के साथ 20 सेकंड तक निकले कण गिनिए, फिर बड़ी सतह के साथ। बाकी सब वैसा ही रखिए।
  • हवा तेज़ कीजिए। क्या काउंटर अब तेज़ी से बढ़ता है?
  • ढक्कन लगाइए। काउंटर का क्या होता है, और क्यों?
झटपट जाँच
4 में से 1
कौन-सा तौलिया सबसे जल्दी सूखेगा?
उत्तर देखें

उत्तर (D) फैलाया हुआ, धूप में, हवादार दिन

बड़ी सतह, गर्मी और हवा, तीनों वाष्पन को तेज़ करती हैं। सिर्फ़ हवादार दिन धूप में फैलाए गए तौलिये के पास ये तीनों हैं। तह करने से तौलिये की ज़्यादातर सतह हवा से छिप जाती है।

8.6 शीतलन प्रभाव

तपती दोपहर में मिट्टी के मटके का पानी बहुत ठंडा लगता है। उसी कमरे में स्टील के बर्तन में रखा पानी गर्म ही रहता है। मटके में कोई बर्फ़ नहीं डालता। तो वह ठंडा कैसे होता है?

3/3वाष्पन ऊष्मा को दूर ले जाता है, इसलिए मटके का पानी ठंडा होता जाता है।

चित्र 8.14पानी मिट्टी से रिसकर वाष्पित होता है, ऊष्मा साथ ले जाता है और अंदर के पानी को ठंडा करता है।NCERT पृ. 156

स्टील का एक बर्तन और मिट्टी का एक मटका, दोनों को काटकर अंदर का पानी दिखाया गया है, और दोनों में एक-एक थर्मामीटर है। शुरुआत में दोनों थर्मामीटर एक जैसा ताप दिखाते हैं और उन पर 'गर्म' लिखा है। दूसरे चरण में मटके के बाहर पानी की छोटी बूँदें दिखती हैं, जिन पर 'बाहर गीला' लिखा है, और टूटी रेखा वाले तीर दिखाते हैं कि उसकी सतह से वाष्प निकल रही है; स्टील का बर्तन सूखा रहता है। आख़िरी चरण में 'ऊष्मा बाहर' लिखे नारंगी तीर मटके से दूर जाते हैं, और उसका थर्मामीटर नीचे गिरता है, जिस पर 'ठंडा' लिखा है, जबकि स्टील का बर्तन गर्म रहता है।

मिट्टी में बहुत-से नन्हे छेद होते हैं, जिन्हें छिद्र (pores) कहते हैं। थोड़ा पानी उनसे रिसकर मटके के बाहरी हिस्से को नम रखता है। यह पानी वाष्पित होता है। वाष्पित होने के लिए पानी को ऊष्मा चाहिए, और वह यह ऊष्मा मटके और उसके अंदर के पानी से लेता है। इसलिए अंदर बचा पानी ठंडा हो जाता है। यह वाष्पन का शीतलन प्रभाव (cooling effect) है।

परिभाषा
वाष्पन का शीतलन प्रभाव

जब किसी सतह से पानी वाष्पित होता है, तो वह उस सतह से ऊष्मा लेता है, इसलिए सतह ठंडी हो जाती है।

उदाहरणत्वचा से पसीने का वाष्पित होना आपको ठंडक देता है।

यही असर आप अपनी त्वचा पर भी महसूस करते हैं। पसीना आने पर वह वाष्पित होकर शरीर को ठंडा करता है। पंखा नम हवा को दूर ले जाकर मदद करता है, जिससे पसीना और तेज़ी से वाष्पित होता है। हैंड सैनिटाइज़र ठंडा लगता है, क्योंकि वह बहुत तेज़ी से वाष्पित होता है।

लोग इस तरकीब का कई तरह से इस्तेमाल करते हैं। गर्मी की शामों में परिवार गर्म आँगन या छत पर पानी छिड़कते हैं। पानी के वाष्पित होने पर फ़र्श ठंडा हो जाता है। खिड़कियों पर टँगी गीली ख़स की चटाइयाँ उनसे होकर आने वाली हवा को ठंडा कर देती हैं।

4/4ऊपर गीला कपड़ा रखा जाता है, और वाष्पन अंदर ठंडक बनाए रखता है।

चित्र 8.15गीली रेत और कपड़े से वाष्पित होता पानी अंदर के बर्तन को ठंडा रखता है।NCERT चित्र 8.7 · पृ. 157

मिट्टी के दो बर्तनों का कटा हुआ दृश्य। पहले चरण में मिट्टी के एक बड़े बर्तन की तली में रेत की परत है। दूसरे चरण में मिट्टी का एक छोटा बर्तन उसके अंदर रेत पर खड़ा है। तीसरे चरण में दोनों बर्तनों के बीच की जगह पानी के बिंदुओं वाली रेत से भरी है, जिस पर 'गीली रेत' लिखा है। आख़िरी चरण में एक गुलाबी गीला कपड़ा छोटे बर्तन को ढकता है, अंदर टमाटर और एक मिर्च रखे हैं, जिन पर 'अंदर ठंडक' लिखा है, और टूटी रेखा वाले तीर दिखाते हैं कि रेत और कपड़े से जलवाष्प निकल रही है।

झटपट जाँच
3 में से 1
मिट्टी के मटके का पानी स्टील के बर्तन के पानी से ठंडा क्यों रहता है?
उत्तर देखें

उत्तर (D) मिट्टी से रिसकर बाहर आया पानी वाष्पित होता है

रिसकर बाहर आया पानी नम मिट्टी से वाष्पित होता है, और वाष्पन अंदर के पानी से ऊष्मा लेता है। मिट्टी ख़ुद ठंडी नहीं होती: सूखा, ख़ाली मटका कमरे जितना ही गर्म होता है। मोटी दीवारें सिर्फ़ गर्म होने की रफ़्तार धीमी कर सकती हैं; वे पानी को कमरे से ज़्यादा ठंडा नहीं बना सकतीं।

8.7 बादल हमें वर्षा कैसे देते हैं?

हर दिन धूप समुद्रों, नदियों, झीलों, गीले खेतों और पत्तियों से भारी मात्रा में जलवाष्प ऊपर उठाती है। वह सारी वाष्प कहाँ जाती है? गर्म, नम हवा ऊपर की ओर उठती है। और जितना ऊपर जाएँ, हवा उतनी ठंडी होती जाती है। इसीलिए शिमला जैसे पहाड़ी शहर मई में भी ठंडे रहते हैं।

आसमान को एक बहुत बड़ा ठंडा गिलास मान लीजिए। ऊपर उठती हवा काफ़ी ठंडी हो जाए, तो उसकी वाष्प संघनित हो जाती है। ठीक वैसे ही, जैसे बर्फ़ वाले गिलास पर बूँदें बनती हैं। पर ऊपर संघनित होने के लिए कोई गिलास नहीं होता। इसके बजाय वाष्प हवा में तैरते धूल, धुएँ या समुद्री नमक के कणों पर जमा होती है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि दिखते नहीं। हर कण पर पानी की एक नन्ही बूँद की परत चढ़ जाती है। अनगिनत नन्ही बूँदें साथ-साथ तैरकर बादल बनाती हैं। तो बादल द्रव पानी है (या बहुत ठंड होने पर बर्फ़ के नन्हे कण), वाष्प नहीं।

बादल की बूँदें इतनी छोटी और हल्की होती हैं कि हवा में तैरती रहती हैं। इधर-उधर बहते हुए वे आपस में टकराकर मिल जाती हैं। बारिश की एक बूँद बनाने में बादल की लगभग दस लाख बूँदें लगती हैं! जब बूँद इतनी भारी हो जाती है कि हवा उसे थाम नहीं पाती, तो वह वर्षा बनकर नीचे गिरती है। ठंडे मौसम या तेज़ तूफ़ान में पानी हिमकणों के रूप में भी गिर सकता है, या बर्फ़ के गोलों के रूप में, जिन्हें ओले कहते हैं।

5/5जो बूँदें तैरने के लिए बहुत भारी हैं, वे वर्षा बनकर गिरती हैं।

चित्र 8.16ऊपर उठती हवा ठंडी होती है, वाष्प धूल पर संघनित होकर बूँदें बनाती है, बूँदें आपस में मिलती हैं, और भारी बूँदें वर्षा बनकर गिरती हैं।NCERT पृ. 157

बाईं ओर एक तीर दिखाता है कि ऊपर ज़्यादा ठंड है। पहले चरण में वाष्प के बिंदुओं वाला गर्म, नम हवा का एक बुलबुला समुद्र से ऊपर उठता है। दूसरे चरण में बुलबुला और ऊपर है और ठंडा हो गया है। तीसरे चरण में एक बादल बन गया है, और 'बादल के अंदर' लिखा एक पास का दृश्य दिखाता है कि धूल के गहरे कणों के चारों ओर पानी की बूँदें बन रही हैं। चौथे चरण में बादल स्लेटी हो जाता है और पास का दृश्य दिखाता है कि छोटी बूँदें एक बड़ी बूँद में मिल रही हैं। आख़िरी चरण में बादल से वर्षा होती है और पास का दृश्य एक भारी बूँद को गिरते दिखाता है।

जल चक्र

अब सारे टुकड़े जोड़िए। पानी महासागरों, झीलों, नदियों, मिट्टी और पत्तियों से वाष्पित होता है। वाष्प ऊपर उठती है, ठंडी होती है और संघनित होकर बादल बनती है। बादल पानी को वर्षा, ओले या हिम के रूप में वापस नीचे भेजते हैं। ज़मीन पर वह छोटी धाराओं और नदियों में बहता है या ज़मीन में रिस जाता है, और आख़िर में फिर से समुद्र तक पहुँचता है। इस कभी न रुकने वाले चक्कर को जल चक्र (water cycle) कहते हैं।

5/5नदियाँ और भूजल पानी को वापस महासागर तक ले जाते हैं।

चित्र 8.17जल चक्र: पानी पृथ्वी की सतह और हवा के बीच लगातार आता-जाता रहता है।NCERT चित्र 8.9 · पृ. 159

एक दृश्य, जिसमें बाईं ओर बर्फ़ से ढका पहाड़, बीच में झील और नदी वाली ज़मीन, दाईं ओर महासागर, और ज़मीन के नीचे भूजल की परत है। पहला चरण बताता है कि पानी कहाँ जमा है: महासागर, झील, नदी और भूजल। दूसरे चरण में महासागर और झील से ऊपर उठते टूटी रेखा वाले तीर जुड़ते हैं, जिन पर 'वाष्पन' लिखा है। तीसरे चरण में तीन बादल जुड़ते हैं, जिन पर 'बादल' और 'संघनन' लिखा है। चौथे चरण में एक बादल से झील के पास ज़मीन पर वर्षा होती है, और पहाड़ की चोटी पर हिमपात होता है। आख़िरी चरण में तीर दिखाते हैं कि नदी नीचे झील और समुद्र तक बहती है, और भूजल महासागर की ओर बहता है।

परिभाषा
जल चक्र

पृथ्वी की सतह और हवा के बीच पानी की कभी न रुकने वाली यात्रा, जो वाष्पन, संघनन, वर्षा या हिमपात, और बहकर वापस समुद्र तक पहुँचने से पूरी होती है।

उदाहरणबंगाल की खाड़ी का पानी मेघालय की पहाड़ियों पर मानसून की वर्षा बनकर गिरता है और बहकर वापस समुद्र में पहुँचता है।

कल्पना कीजिए कि पृथ्वी का सारा पानी एक लीटर की बोतल में डाल दिया गया है। उसमें से लगभग 975 mL खारा समुद्री पानी होगा। बचे हुए मीठे पानी का ज़्यादातर हिस्सा बर्फ़ के रूप में जमा है या ज़मीन के बहुत नीचे छिपा है। जिस मीठे पानी तक हम नदियों, झीलों और कुओं में आसानी से पहुँच सकते हैं, उससे मुश्किल से दो चम्मच भरेंगे। जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं, ज़्यादा से ज़्यादा लोग उन्हीं दो चम्मचों को बाँटते हैं। इसलिए हर गर्मी में कई जगहों पर पानी कम पड़ जाता है।

इसलिए हर बूँद कीमती है। ब्रश करते समय नल बंद रखिए। टपकते नल ठीक करवाइए। सब्ज़ियाँ धोने के पानी से पौधों को सींचिए। नदियों और तालाबों में कभी कचरा न फेंकिए। पानी की देखभाल के बारे में आप अध्याय 11, प्रकृति के ख़ज़ाने में और सीखेंगे।

झटपट जाँच
4 में से 1
वर्षा बनने के चरणों को सही क्रम में लगाइए।
  1. वाष्प धूल पर संघनित होकर बूँदें बनाती है
  2. भारी बूँदें वर्षा बनकर गिरती हैं
  3. ऊपर जाकर हवा ठंडी होती है
  4. बूँदें मिलकर बड़ी बूँदें बनती हैं
  5. गर्म, नम हवा ऊपर उठती है
उत्तर देखें
उत्तर
  1. गर्म, नम हवा ऊपर उठती है
  2. ऊपर जाकर हवा ठंडी होती है
  3. वाष्प धूल पर संघनित होकर बूँदें बनाती है
  4. बूँदें मिलकर बड़ी बूँदें बनती हैं
  5. भारी बूँदें वर्षा बनकर गिरती हैं
वाष्प के संघनित होने से पहले हवा का ऊपर उठना और ठंडा होना ज़रूरी है। फिर बूँदें मिलकर तब तक बढ़ती हैं, जब तक वे गिरने लायक भारी न हो जाएँ।
फ़्लैश कार्ड · 9

याद रखने लायक शब्द

1 / 9
दोहराइए

सारांश और मुख्य बिंदु

  1. बर्फ़, पानी और जलवाष्प एक ही पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं (बर्फ़ और पानी)।
  2. खुले में रखा पानी धीरे-धीरे अदृश्य जलवाष्प में बदल जाता है। यही वाष्पन है, और यह बिना उबले भी होता है (खंड 8.1)।
  3. केतली के पास दिखने वाला सफ़ेद गुबार द्रव पानी की नन्ही बूँदें हैं; जलवाष्प ख़ुद अदृश्य होती है (खंड 8.1)।
  4. जब वाष्प किसी ठंडी चीज़ से मिलती है, तो वह फिर से द्रव बन जाती है। यही संघनन है, जैसे ठंडे गिलास पर या ओस के रूप में (खंड 8.2)।
  5. पसीना छोड़ता गिलास भारी हो जाता है, जबकि उसमें पानी का स्तर वही रहता है, इसलिए बूँदें हवा से आती हैं (तौलने वाला परीक्षण)।
  6. ठोस अपना आकार बनाए रखते हैं, द्रव बर्तन का आकार ले लेते हैं, और गैसें उन्हें मिली पूरी जगह भर देती हैं (खंड 8.3)।
  7. गर्म करने से पिघलना और वाष्पन होता है; ठंडा करने से संघनन और जमना होता है (खंड 8.4)।
  8. बड़ी सतह, ज़्यादा गर्मी, तेज़ हवा और कम आर्द्रता होने पर पानी तेज़ी से वाष्पित होता है (खंड 8.5)।
  9. निष्पक्ष परीक्षण में हम एक चीज़ बदलते हैं, बाकी सब वैसा ही रखते हैं और नतीजा मापते हैं (खंड 8.5)।
  10. वाष्पन ऊष्मा को दूर ले जाता है, जिससे पसीने वाली त्वचा, मटका और पॉट-इन-पॉट कूलर ठंडे होते हैं (खंड 8.6)।
  11. ऊपर उठती हवा ठंडी होती है, और उसकी वाष्प धूल पर संघनित होकर बादल की बूँदें बनाती है, जो मिलकर वर्षा, ओले या हिम के रूप में गिरती हैं (खंड 8.7)।
  12. जल चक्र पानी को पृथ्वी की सतह और हवा के बीच बार-बार घुमाता है, और मीठे पानी को बचाना ज़रूरी है (जल चक्र)।
अभ्यास · 16 प्रश्न

अभ्यास प्रश्न उत्तर सहित (NCERT अभ्यास से मेल)

प्रश्न 1–10 में वही कौशल नई स्थितियों में परखे गए हैं, जो NCERT के अभ्यास में हैं। बाकी प्रश्न छोटी अतिरिक्त जाँच हैं।

  1. झटपट उत्तरआसानNCERT अभ्यास, प्रश्न 1

    इनमें से कौन-सा संघनन का उदाहरण है?

    उत्तर देखें

    उत्तर (D) कोल्ड ड्रिंक के ठंडे कैन के बाहर बूँदें बनना

    संघनन यानी वाष्प का द्रव में बदलना, जैसे ठंडे कैन पर। मिटते निशान वाष्पन दिखाते हैं, कुल्फ़ी पिघलना दिखाती है, और बर्फ़ की ट्रे जमना दिखाती है।
  2. लघु उत्तरआसानNCERT अभ्यास, प्रश्न 2

    हर स्थिति में वह काम चुनिए जिसमें वाष्पन की बड़ी भूमिका है।

    1. दीवार सजाना:

      उत्तर देखें

      उत्तर (A) पानी वाले पेंट से उसे रँगना

      पानी वाला पेंट उसके पानी के वाष्पित होने पर सूखता है। टेप और कील में कुछ सूखता नहीं।
    2. रसोई में काम करना:

      उत्तर देखें

      उत्तर (B) धूप में पापड़ सुखाना

      पापड़ धूप में सुखाए जाते हैं, ताकि उनका पानी वाष्पित हो जाए। बाकी कामों में कुछ सूखता नहीं।
  3. लघु उत्तरमध्यमNCERT अभ्यास, प्रश्न 3

    एक ही कॉलोनी में दो छतें पास-पास हैं। एक पर छोटा-सा लॉन और गमलों में बहुत-से पौधे हैं; दूसरी पर सिर्फ़ सीमेंट की टाइलें हैं। मई की दोपहर में पौधों वाली छत ज़्यादा ठंडी लगती है। समझाइए, क्यों।

    हल दिखाइए

    उत्तरपत्तियों और नम मिट्टी से वाष्पित होता पानी ऊष्मा को दूर ले जाता है, इसलिए पौधों वाली छत ठंडी रहती है।

    पौधे मिट्टी से पानी लेते हैं और उसका कुछ हिस्सा पत्तियों से जलवाष्प के रूप में छोड़ते हैं। गमलों और लॉन की नम मिट्टी से भी पानी वाष्पित होता है।

    वाष्पन आसपास से ऊष्मा लेता है, इसलिए पौधों के पास की हवा और सतहें ठंडी हो जाती हैं। ख़ाली टाइलों के पास वाष्पित होने के लिए पानी नहीं होता। वे सिर्फ़ सूरज की गर्मी सोखती हैं, इसलिए बहुत ज़्यादा गर्म लगती हैं।

  4. लघु उत्तरआसानNCERT अभ्यास, प्रश्न 4

    हवा में गायब होने वाला द्रव सिर्फ़ पानी नहीं है। तीन और द्रवों के नाम बताइए जिन्हें आपने वाष्पित होते देखा है, और बताइए कि हर एक के बारे में आपको कैसे पता चला कि वह वाष्पित हो रहा है।

    हल दिखाइए

    उत्तरउदाहरण: हैंड सैनिटाइज़र, परफ़्यूम या इत्र, और नेल-पॉलिश रिमूवर।

    • हैंड सैनिटाइज़र कुछ ही सेकंड में हथेलियों से गायब हो जाता है और उन्हें ठंडा छोड़ जाता है।
    • रुई पर लगा परफ़्यूम या इत्र वाष्पित होते हुए हल्का पड़ता जाता है, और उसकी महक पूरे कमरे में फैल जाती है।
    • रुई पर डाली नेल-पॉलिश रिमूवर की कुछ बूँदें लगभग तुरंत सूख जाती हैं।
    • पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की तेज़ महक आती है, क्योंकि उसका कुछ हिस्सा वाष्पित होकर हवा में मिल जाता है।
  5. दीर्घ उत्तरमध्यमNCERT अभ्यास, प्रश्न 5

    रिया कहती है: “पंखा ठंडी हवा देता है, और ठंडी हवा वाष्पन को धीमा करती है। इसलिए पंखे के नीचे कपड़े धीरे सूखने चाहिए।” फिर भी उसके कपड़े पंखे के नीचे जल्दी सूखते हैं। उसके तर्क में ग़लती कहाँ है?

    हल दिखाइए

    उत्तरपंखा हवा को ठंडा नहीं करता; वह उसे बस चलाता है। चलती हवा कपड़े के पास की नम हवा को दूर ले जाती है, इसलिए वाष्पन तेज़ होता है।

    पंखा कमरे की हवा को बस चलाता है। हवा कमरे के ताप पर ही रहती है, इसलिए रिया की पहली बात ग़लत है।

    गीले कपड़े के पास की हवा जल्दी ही जलवाष्प से भर जाती है। ऐसी नम हवा नई वाष्प को बहुत धीरे लेती है। पंखा इस नम हवा को बार-बार सूखी हवा से बदलता रहता है, इसलिए पानी तेज़ी से वाष्पित होता रहता है।

    पंखे के नीचे हमें ठंडक इसलिए लगती है कि वह हमारे पसीने के वाष्पन को तेज़ करता है। यह वाष्पन हमारी त्वचा से ऊष्मा लेता है। हवा ख़ुद ठंडी नहीं होती।

  6. दीर्घ उत्तरमध्यमNCERT अभ्यास, प्रश्न 6

    गहाई (थ्रेशिंग) के बाद एक किसान गीले धान को खलिहान में पतली परत में फैला देती है। वह उसे दो दिन धूप में छोड़ देती है। उसके बाद ही उसे बोरियों में भरकर ट्रैक्टर से गोदाम ले जाया जाता है। समझाइए कि इंतज़ार करने से पैसे कैसे बचते हैं और अनाज को सँभालना आसान कैसे होता है।

    हल दिखाइए

    उत्तरअनाज से पानी वाष्पित हो जाता है, इसलिए बोरियाँ हल्की हो जाती हैं। हर चक्कर में ज़्यादा अनाज जाता है, इसलिए कम चक्कर और कम ईंधन लगता है, और सूखे अनाज को उठाना और रखना आसान होता है।

    अभी-अभी गहाई किए गए धान में बहुत पानी होता है। पतली परत में फैलाने पर उसकी बड़ी सतह धूप और हवा के सामने खुली रहती है। इसलिए दो दिनों में इस पानी का बड़ा हिस्सा वाष्पित हो जाता है।

    अब उसी अनाज का वज़न कम है। ट्रैक्टर हर चक्कर में उसे ज़्यादा ले जा सकता है, इसलिए कम चक्कर लगाने पड़ते हैं और ईंधन पर कम पैसा ख़र्च होता है। हल्की, सूखी बोरियों को मज़दूर आसानी से और सुरक्षित ढंग से उठा सकते हैं। और सूखा अनाज गोदाम में न आपस में चिपकता है, न सड़ता है।

  7. क्रियाकलापआसानNCERT अभ्यास, प्रश्न 7

    एक दिन के लिए घर पर “पानी गायब होने की डायरी” बनाइए। ऐसे पाँच कामों की सूची बनाइए जिनमें वाष्पन होता है। हर एक के लिए बताइए कि वाष्पन मदद करता है या परेशानी पैदा करता है। वाष्पन के बारे में जानने से आपके परिवार को क्या मदद मिलती है?

    हल दिखाइए

    एक नमूना डायरी:

    1. रस्सी पर सूखते कपड़े: मदद करता है।
    2. पोंछे के बाद सूखता फ़र्श: मदद करता है।
    3. चावल के बर्तन से उबलकर उड़ता पानी: अगर चावल जल जाएँ तो परेशानी।
    4. त्वचा पर सूखता पसीना: ठंडा रखने में मदद करता है।
    5. गर्म दिन में खुली बाल्टी में पानी का घटना: परेशानी, क्योंकि पानी बर्बाद होता है।

    वाष्पन के बारे में जानने से हम योजना बना पाते हैं। हम कपड़ों को धूप और हवा में फैलाते हैं, जमा किए पानी को ढककर रखते हैं, और पीने का पानी ठंडा करने के लिए मटके का उपयोग करते हैं।

  8. लघु उत्तरआसानNCERT अभ्यास, प्रश्न 8

    बर्फ़ के टुकड़े फ़्रीज़र से आते हैं। ऐसी तीन जगहें या मौक़े बताइए जहाँ प्रकृति ख़ुद ठोस पानी बनाती है।

    हल दिखाइए

    उत्तरऊँचे पहाड़ों पर हिम और हिमनद (glaciers), उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के पास बर्फ़ की चादरें, और कुछ तूफ़ानों में गिरने वाले ओले।

    ऊँचे हिमालय पर साल भर हिम और हिमनद रहते हैं। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों के पास की ज़मीन और समुद्र बर्फ़ की मोटी चादरों से ढके रहते हैं। तूफ़ानों में कभी-कभी ओले गिरते हैं। सर्दी की बहुत ठंडी सुबहों में घास पर जमा पाला एक और उदाहरण है।

  9. दीर्घ उत्तरमध्यमNCERT अभ्यास, प्रश्न 9

    आपका स्कूल विश्व जल दिवस के लिए पोस्टर बना रहा है। पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है, क्योंकि उसका बहुत बड़ा हिस्सा पानी से ढका है। तो फिर हमें पानी बचाने की ज़रूरत क्यों है? दो कारण बताइए, और ऐसे तीन काम भी जो आपका परिवार कर सकता है।

    हल दिखाइए

    उत्तरपृथ्वी का ज़्यादातर पानी खारा है, और मीठा पानी सीमित है, जबकि उसका उपयोग करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। परिवार नल बंद रख सकते हैं, टपकते नल ठीक करवा सकते हैं और पानी का दोबारा उपयोग कर सकते हैं।

    पृथ्वी का ज़्यादातर पानी खारा समुद्री पानी है। सिर्फ़ थोड़ा-सा हिस्सा नदियों, झीलों और ज़मीन के नीचे मीठे पानी के रूप में है, और वह हर जगह बराबर नहीं बँटा है। लोगों की संख्या बढ़ रही है, इसलिए ज़्यादा लोगों को यही थोड़ा-सा पानी बाँटना पड़ता है। गर्मियों में कई जगहों पर पानी कम पड़ जाता है। गंदा पानी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं होता, जिससे काम आने लायक पानी और भी कम हो जाता है।

    घर पर हम ब्रश करते समय नल बंद रख सकते हैं, टपकते नल ठीक करवा सकते हैं, और सब्ज़ियाँ धोने के पानी से पौधे सींच सकते हैं। हम यह भी ध्यान रख सकते हैं कि नालियों और तालाबों में कोई कचरा न जाए।

  10. लघु उत्तरमध्यमNCERT अभ्यास, प्रश्न 10

    गर्मी की दोपहर में पार्क की स्टील की फिसलपट्टी इतनी गर्म है कि उसे छुआ नहीं जा सकता। उसे जल्दी ठंडा करने का एक तरीका सुझाइए, और समझाइए कि यह क्यों काम करता है।

    हल दिखाइए

    उत्तरउस पर थोड़ा पानी छिड़किए, या गीले कपड़े से पोंछिए। पानी वाष्पित होते हुए फिसलपट्टी से ऊष्मा ले लेता है।

    फिसलपट्टी पर थोड़ा पानी छिड़किए, या उसे गीले कपड़े से पोंछिए। गर्म स्टील से पानी जल्दी वाष्पित होता है, और वाष्पन सतह से ऊष्मा लेता है। कुछ मिनटों में फिसलपट्टी ठंडी हो जाती है। सूखने पर उसे फिर गीला करने से वह और ठंडी होती है।

  11. झटपट उत्तरआसान

    जलवाष्प के फिर से द्रव पानी में बदलने को कहते हैं।

    उत्तर देखें

    उत्तर संघनन

    संघनन यानी वाष्प का द्रव में बदलना, जो वाष्पन का उल्टा है।
  12. झटपट उत्तरआसान

    बर्फ़ का एक टुकड़ा गर्म चूल्हे पर रखे खुले स्टील के पैन में डालकर छोड़ दिया गया। पैन में आपको जो दिखेगा, उसे पहले से आख़िर तक क्रम में लगाइए।

    1. सिर्फ़ पानी, जो और गर्म होता जाता है
    2. थोड़े पानी में तैरती बर्फ़
    3. एक ख़ाली, सूखा पैन
    4. बर्फ़ का एक ठोस टुकड़ा
    उत्तर देखें
    उत्तर
    1. बर्फ़ का एक ठोस टुकड़ा
    2. थोड़े पानी में तैरती बर्फ़
    3. सिर्फ़ पानी, जो और गर्म होता जाता है
    4. एक ख़ाली, सूखा पैन
    ऊष्मा पहले बर्फ़ को पिघलाकर पानी बनाती है। और ऊष्मा मिलने पर पानी और तेज़ी से वाष्पित होता जाता है, जब तक कि वह उबलकर पूरा वाष्प न बन जाए और पैन सूखा न रह जाए।
  13. झटपट उत्तरमध्यम

    हर प्रेक्षण को उस बदलाव से मिलाइए जिसके कारण वह होता है।

    बाईं ओर कोई चीज़ छुइए, फिर दाईं ओर उसका जोड़ा।

    उत्तर देखें
    उत्तर
    • रस्सी पर सूखते कपड़े : वाष्पन
    • भोर में घास पर ओस : संघनन
    • धूप में मक्खन का नरम होना : पिघलना
    • फ़्रीज़र में पानी का बर्फ़ बनना : जमना
    सूखना वाष्पन है, ओस संघनन है, मक्खन का नरम होना पिघलना है, और बर्फ़ बनना जमना है।
  14. झटपट उत्तरआसान

    गीले कपड़ों को ढेर में छोड़ने के बजाय फैलाने से वे जल्दी सूखते हैं।

    उत्तर देखें

    उत्तर सही

    फैलाने से पानी की ज़्यादा बड़ी सतह हवा को छूती है, इसलिए वह तेज़ी से वाष्पित होता है।
  15. झटपट उत्तरमध्यम

    तौलने वाले एक परीक्षण में बर्फ़ वाले पानी के ढके गिलास की रीडिंग शुरुआत में 352.4 g थी और 20 मिनट बाद 353.2 g। बाहर कितने ग्राम पानी संघनित हुआ?

    g
    उत्तर देखें

    उत्तर 0.8 g

    353.2 g−352.4 g=0.8 g पानी हवा से ठंडे गिलास पर संघनित हुआ।
  16. झटपट उत्तरमध्यम

    गर्म, सूखे और हवादार दिन पीने का पानी कौन-सा बर्तन सबसे ठंडा रखेगा?

    उत्तर देखें

    उत्तर (C) छायादार, हवादार जगह पर रखा मिट्टी का मटका

    पानी मिट्टी से रिसता है और सूखी, चलती हवा में सबसे तेज़ी से वाष्पित होता है, जिससे अंदर का पानी ठंडा होता है। छाँव धूप को उसे गर्म करने से रोकती है।

अपना NCERT अभ्यास प्रश्न खोजें

हमारे अभ्यास प्रश्न ncert.ai के लिए लिखे गए हैं और NCERT अभ्यास के क्रम में हैं। अपनी पाठ्यपुस्तक के प्रश्न से मेल खाता प्रश्न खोजिए; उसका उत्तर उसी के साथ है।

आपकी NCERT पाठ्यपुस्तक मेंयहाँ अभ्यास प्रश्न
NCERT अभ्यास, प्रश्न 1अभ्यास प्रश्न 1
NCERT अभ्यास, प्रश्न 2अभ्यास प्रश्न 2
NCERT अभ्यास, प्रश्न 3अभ्यास प्रश्न 3
NCERT अभ्यास, प्रश्न 4अभ्यास प्रश्न 4
NCERT अभ्यास, प्रश्न 5अभ्यास प्रश्न 5
NCERT अभ्यास, प्रश्न 6अभ्यास प्रश्न 6
NCERT अभ्यास, प्रश्न 7अभ्यास प्रश्न 7
NCERT अभ्यास, प्रश्न 8अभ्यास प्रश्न 8
NCERT अभ्यास, प्रश्न 9अभ्यास प्रश्न 9
NCERT अभ्यास, प्रश्न 10अभ्यास प्रश्न 10

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

  1. बर्फ़ और पानी: एक ही या अलग-अलग?2 प्रश्न
  2. 8.1 पानी के गायब होने की जाँच3 प्रश्न
  3. 8.2 एक और रहस्य4 प्रश्न
  4. 8.3 पानी की अलग-अलग अवस्थाएँ कौन-सी हैं?3 प्रश्न
  5. 8.4 हम पानी की अवस्था कैसे बदल सकते हैं?3 प्रश्न
  6. 8.5 पानी को तेज़ी से या धीरे वाष्पित कैसे किया जा सकता है?4 प्रश्न
  7. 8.6 शीतलन प्रभाव3 प्रश्न
  8. जल चक्र4 प्रश्न
शब्दावली · 13

मुख्य शब्द (हिंदी–English)

अवस्थाstateavastha
कोई पदार्थ जिन रूपों में हो सकता है, उनमें से एक: ठोस, द्रव या गैस।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
आर्द्रताhumidityaardrata
हवा में कितनी जलवाष्प है, इसका माप। नम दिनों में गीली चीज़ें धीरे सूखती हैं।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
ओसdewos
पानी की बूँदें, जो रात में हवा की जलवाष्प के संघनन से ठंडी पत्तियों और घास पर बनती हैं।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
गैसgasgais
वह अवस्था जिसका अपना कोई आकार नहीं होता और जो मिली हुई पूरी जगह में फैल जाती है, जैसे जलवाष्प।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
जमनाfreezingjamna
ठंडा करने पर द्रव का ठोस में बदलना।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
जल चक्रwater cyclejal chakra
वाष्पन, संघनन, वर्षा या हिमपात और बहाव के द्वारा पृथ्वी की सतह और हवा के बीच पानी की कभी न रुकने वाली आवाजाही।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
जलवाष्पwater vapourjalvashp
गैस अवस्था में पानी। यह अदृश्य होती है और हवा में मिली रहती है।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
ठोसsolidthos
वह अवस्था जो अपना आकार बनाए रखती है और बहती नहीं, जैसे बर्फ़।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
द्रवliquiddrav
वह अवस्था जो बहती है और बर्तन का आकार ले लेती है, पर जिसका आयतन वही रहता है, जैसे पानी।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
पिघलनाmeltingpighalna
गर्म करने पर ठोस का द्रव में बदलना।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
वाष्पनevaporationvashpan
द्रव पानी का जलवाष्प में बदलना। यह सतह से होता है, कमरे के ताप पर भी।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
शीतलन प्रभावcooling effectsheetalan prabhav
किसी सतह से पानी वाष्पित होने पर उस सतह का ठंडा होना, क्योंकि पानी ऊष्मा अपने साथ ले जाता है।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →
संघननcondensationsanghanan
ठंडा होने पर जलवाष्प का द्रव पानी में बदलना।अध्याय में पहली बार यहाँ आया →

आप अध्याय के अंत तक पहुँच गए